चोलों ने अपने विशाल साम्राज्य के लिए एक मजबूत और संगठित प्रशासनिक व्यवस्था बनाई थी। शासन का सर्वोच्च अधिकारी राजा होता था, जिसके अधिकार बहुत अधिक थे। राजा का पद वंशानुगत था, यानी राज्य का उत्तराधिकारी राजपरिवार से ही चुना जाता था। आमतौर पर सबसे बड़े पुत्र को राजा बनाया जाता था। राजा को शासन चलाने में मंत्रियों और अधिकारियों की सहायता मिलती थी।
चोलों के पास एक मजबूत सेना थी, जिसमें सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। राजा की रक्षा के लिए एक अलग अंगरक्षक दल भी था। सेना का संचालन नायक, सेनापति और महा दंडनायक जैसे अधिकारी करते थे।
चोल साम्राज्य में राजा सर्वोच्च शासक होता था, जिसकी शक्ति वंशानुगत होती थी। राजा का शासन चलाने में मंत्रिपरिषद और अन्य उच्च अधिकारी सहायता करते थे।
राजा की सहायता के लिए एक संगठित मंत्रिपरिषद होती थी, जिसमें विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल होते थे। इनमें प्रमुख पद निम्नलिखित थे:
राजा अपनी नीतियों को प्रभावी बनाने के लिए एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक तंत्र का निर्माण करता था, जो राज्य की आर्थिक, न्यायिक और सैन्य व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करता था।
चोल साम्राज्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए उसे विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया गया था। यह विभाजन निम्नलिखित था:
प्रांतीय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य कर संग्रह, कानून व्यवस्था बनाए रखना, और कृषि तथा व्यापार को बढ़ावा देना था। नाडु के प्रमुख स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी नाट्टार कहलाते थे।
चोल शासन प्रणाली में स्थानीय प्रशासन को विशेष महत्व दिया गया था। स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों को स्वायत्त रूप से कार्य करने की स्वतंत्रता दी गई थी।
ग्राम प्रशासन चोल शासन की सबसे बड़ी विशेषता थी। गाँवों में निम्नलिखित प्रशासनिक इकाइयाँ थीं:
ग्राम सभाएँ विभिन्न समितियों का गठन करती थीं, जो विभिन्न कार्यों का निष्पादन करती थीं। इनमें शामिल थीं:
चोल साम्राज्य की आर्थिक व्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित थी। कर संग्रह और राजस्व प्रणाली अत्यंत संगठित थी।
चोल शासन के दौरान व्यापार बहुत विकसित था।
चोल प्रशासन की न्याय प्रणाली संगठित थी।
चोल प्रशासन अत्यधिक संगठित और प्रभावी था। केंद्रीय प्रशासन राजा के नेतृत्व में कार्य करता था, जबकि प्रांतीय और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयाँ सुचारू रूप से कार्य करती थीं। सबसे महत्वपूर्ण विशेषता गाँवों को दी गई स्वायत्तता थी, जिससे प्रशासनिक कार्य कुशलता से पूरे किए जाते थे। समय के साथ, राजकीय हस्तक्षेप बढ़ता गया, लेकिन चोल शासन प्रणाली अपनी स्थानीय प्रशासनिक स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध रही।
चोल साम्राज्य की यह शासन प्रणाली न केवल अपने समय में बल्कि भविष्य की शासन प्रणालियों के लिए भी एक मिसाल बनी।